आदिवासी महिला बम के फटने से गंभीर हालत यह गंभीर बड़ी जांच की विषय बन चुका है कि अब आदिवासी नक्सली पुलिस के निशाने : सोनी सोरी
बस्तर में घटना अत्यंत हृदयविदारक और चिंता का विषय है। सरस्वती ओयाम, जो वर्षों से आदिवासी अधिकारों और महिला सशक्तिकरण के लिए संघर्ष कर रही हैं, उनका इस तरह बम विस्फोट की चपेट में आना यह दर्शाता है कि इस हिंसा का सबसे बड़ा शिकार आदिवासी समुदाय ही बन रहा है। जिसमे सभी गठब पुलिस या नक्सल गठनायो जांच होनी चाहिए जिसे आदिवासियों जान बच सके
सरकार और नक्सलियों के बीच जारी इस संघर्ष में सबसे अधिक पीड़ा उन्हीं लोगों को झेलनी पड़ रही है, जिनका इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। नक्सल विरोधी अभियानों में पुलिस कार्रवाई हो या नक्सली हिंसा, दोनों ही परिस्थितियों में निर्दोष आदिवासी ही मारे जा रहे हैं। इस अंतहीन संघर्ष ने न केवल जानमाल की हानि की है, बल्कि आदिवासी समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
सरकार को चाहिए कि वह इस समस्या के समाधान के लिए बंदूक की जगह संवाद और विकास को प्राथमिकता दे। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विकास के बिना यह संकट कभी समाप्त नहीं होगा। वहीं, नक्सल आंदोलन को भी यह सोचना होगा कि उनकी लड़ाई का असली मूल्य कौन चुका रहा है।
सरस्वती ओयाम के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए, यह आवश्यक है कि इस संघर्ष के मानवीय पक्ष पर ध्यान दिया जाए और दीर्घकालिक शांति की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों।